सत्य के पथिक को रोशन करती है पूज्य माँ की भक्ति और करुणा

12 मार्च (होली) पूज्य मैयाजी अवतरण दिवस विशेष

अपनी ओजस्वी वाणी से लाखों-करोंड़ों हृदयों को आनंदित और आल्हादित करनेवाले, आध्यात्मिक ज्ञान को सरल शैली में जन-जन के मन में स्थापित करनेवाले विश्ववंदनीय संत श्री आशारामजी बापू की धर्मपत्नी के रूप में स्थान पानेवाली, माउंट आबू की नलगुफा में वर्षों तक तपस्या करनेवाले रिद्धि-सिद्धि के धनी बंगाली योगी श्री केशवानंदजी को ब्रह्मसिद्ध पू. श्री लीलाशाहजी बापू के संकेतानुसार अपने पुत्र रूप में प्राप्त करनेवाली श्री श्री माँ लक्ष्मी देवीजी को कोटि-कोटि नमन ।

पूज्य मैयाजी यानी की एक निरंतर बहती अविरत ज्ञान गंगा हैं । बड़े सद्भाग्य से हमें इस पवित्र वरदायिनी ज्ञान गंगा में स्नान करने का सुअवसर प्राप्त हुआ और यह अवसर देने कीकृपा भी जगतजननी कृपास्वरुपिणी पूज्य मैयाजी की है । सत्य के मार्ग पर चलनेवाले हर साधक के भीतर पूज्य माँ अनंत शक्ति का स्रोत प्रवाहित कर देती हैं । अपने दिव्य नेत्रों से हमारे हर इन्द्रियों में ज्ञान का प्रकाश भर देती हैं । वह श्रद्धा-भक्ति से भरपूर माँ वरदायिनी हमारी नीचे की ओर बहती हुई ऊर्जा को ऊपर के केंद्रों में स्थित करके दिव्यलोक की हमें यात्रा करवाती हैं । क्या नहीं मिला उनसे? उनके पवित्र दर्शनों से जो भीतर आनंद प्रकट होता है वह तो अवर्णनीय है । उस दिव्य आनंद से आनंदित होते हैं हम और जीवन के अंतिम श्वास तक ऐसे ही आनंदित होते रहेंगे । एक सत्शिष्य ही जान सकता है माँ की उस मधुर दृष्टी का आध्यात्मिक रहस्य । दुनिया क्या जाने इस दिव्य प्रेम को ! बछड़े के पास दूध पीने के लिए एक मुख होता है परंतु गौमाता के पास चार थन होते हैं । अपने उद्धार की लगन जितनी हमें नहीं है उतनी मैयाजी हमारे उद्धार का सोचते हैं । वे सदैव चाहते हैं कि उनकी संतानें जल में कमल कीतरह सुशोभित हों ! दिव्य ज्ञान से आलोकित हों ! भगवद्स्वरुपा पूज्य माँ अपना सम्पूर्ण स्नेह हम पर लुटाती हैं, किन्तु बदले में हमसे कुछ नहीं लेती हैं । सूर्य का कार्य है सदैव जीवों को अपने प्रकाश से स्वस्थ जीवन देना । उस प्रकाश का कोई आकार नहीं है वह तो निराकार है ! वैसे ही पूज्य माँ की शक्ति उनकी कृपा, करूणा, निराकार है । अनंत है, असीम है, उनकी कृपा का कोई पार नहीं, अंत नहीं ।

सब्र संतोष है मिलता, माँ के पास आने से ।

खजाने भर दिए माँ ने जरा-सा मुस्कुराने से ॥

प्रत्यक्ष को प्रमाण कीकहाँ आवश्यकता होती है? पूज्य माँ के सान्निध्य से उनके मधुर वचनों से जो उन्नति होती है वह तो हम कभी अपने आपसे नहीं कर सकते । इन दिनों पूज्य माँ का सान्निध्य-दर्शन बाहर से मिलना भले ही कम हो गया हो किन्तु पूर्व में किये हुए माँ के दिव्य दर्शन की झलकियाँ और उनका आंतरिक एवं आध्यात्मिक स्नेह सदैव हमारी छत्रछाया बनकर हमें अध्यात्मिक मार्ग पर उन्नत करता रहेगा । पूज्य माँ का स्नेह हमें दैवी सम्पदा से ओतप्रोत कर देता है । वे डाँट के रूप में या प्यार के रूप में कृपा तो सदा ही करती हैं ।

सिर पर रहे सदा ममता की छाया...जो प्यार हमको आपने दिया है, क्या दे कोई दूसरा ?

माँ तो है माँ, माँ तो है माँ ... माँ जैसी दुनिया में है कोई कहँा ?

शरण ग्रहण करने योग्य आप ही हैं माँ,

आपके सिद्धांतों पर चलकर हमने सब खुशियाँ पाई ।

पूर्णता पाते हैं सत्पात्र जिन्होंने आपके ज्ञान से लगन लगायी ।

बस यही प्रार्थना है माँ के चरणों में कि हमें अविवेक से विवेक कीओर, दुर्मति से सन्मति की ओर, अज्ञान से ज्ञान कीओर ले चलना ।

पूज्य मैयाजी कीवाणी करुणामयी और सारगर्भित है । जो भी पूज्य मैया के निकट जाये तो यह अनुभव हृदय अवश्य करता है कि, ‘चंचलता मन कीमिट जाती है, मेरी माँ के निकट आने से..., सच्ची अंतर्मुखता आती है, निखरता है वह सदा बिखरता नहीं जिन पर एक नजर उनकी पड़ जाती है ।’

पूज्य मैयाजी शब्दों का प्रयोग बहुत ही कम  करते हैं, परन्तु उनके शब्द शिष्य को नि:शब्दता के जगत की यात्रा करवाए बिना नहीं रहते और अधिक क्या लिखें? उनकी गाथा तो अवर्णनीय है । संयम,     सदाचार, पवित्रता, सद्विवेक के रूप में, प्रेम-करुणा के रूप में, शक्ति, भक्ति, श्रद्धा, प्रेरणा के रूप में, मौन के रूप में, हर रूपों में हमारी प्यारी पूजनीय मैया सदैव विद्यमान हैं ।

आपकी कृपा तो निरंतर बरस रही है, 

 बस ! हमारा सहयोग हो जाये ।

ऐसी प्यारी जग से निराली मैयाजी को अवतरण दिवस की बहुत बहुत बधाईयाँ ।

 

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