उनकी पूर्ण महिमा तो वेद पुराण भी नहीं गा सकते........

उनकी पूर्ण महिमा तो वेद पुराण भी नहीं गा सकते........

 

 मैं सात साल से अहमदाबाद आश्रम में समर्पित हूॅ । मेरा नाम राकेश है । साहित्य विभाग में सेवा करता हूॅ । एक बार पुज्य साॅईजी को अहमदाबाद आश्रम में आये हुए दो महिने से अधिक समय हो गया था । मैं ध्यान भजन करके व्यासपीठ की परिक्रमा करके जा रहा था । मुझे पूज्य साॅईजी की याद आई और नेत्रों से से अविरल आॅसू बहने लगे । आॅसू बहते जा रहे थे और अन्र्तमन से प्रार्थना किये जा रहा था कि कब दर्शन दोगे प्रभु । उसी दिन पूज्य साॅईजी फलाइट से अहमदाबाद आश्रम आ गये और बोले, ‘दर्शन के लिए तडप रहे थे ना ! लो, जी भरकर दर्शन कर लो ।’ मेरे नेत्र प्रेम के आसूॅ से भी गये । शरद पूर्णिमा करके पूज्य साॅईजी पेढमाला चले गये । पूज्य साॅईजी की याद सताये जा रही थी कि अब दर्शन कब होगे । रात को हम तीन.चार भाई पूज्य साॅईजी की चर्चा कर रहे थे कि अब कब आयेंगे, उनका दर्शन कब होगा ।  उनके सुमिरन चिंतन में रात्रि के 1ः30 बज गये । समय का पता भी नहीं चला कि कैसे बीत गया । सोने पर भी उन्हीं का चिंतन चल रहा था कि पूज्य साॅईजी अब कब आयेंगे । दूसरे ही दिन पूज्य साॅईजी अहमदाबाद आश्रम में आ गये। मैं दर्शन के लिए रास्ते में खडा था। पूज्यश्री मेरी तरफ उंगली करके बोले ‘ बढिया हो? रात को याद कर रहे थे ना कि अब दर्शन कब होगा! देखो मैं आ गया । ’ मेरे नेत्रों से प्रेम के आॅसू बहने लगे । कितने भक्तवत्सल हैं मेरे साॅई जो भक्तों की पुकार सुनकर शीघ्र उनके पास आ जाते हैं।

 

        पूज्य साॅईजी शांति कुटिया से दर्शन देने के लिए बाहर आते तो मुझे स्वयं ही अन्तप्र्रेरणा हो जाती है और मैं दौड कर वहां पहुंच जाता । उनका सुमिरण करके शांत बैठने से स्वयं ही अध्शत्मिक प्रश्नों का समाधान मिल जाता है। ऐसा तो अनेकों साधकों का अनुभव है । जो भी साधक सच्चे अन्तर्भाव से उन्हें पुकारता है उसे श्रीसाॅई जी की कृपा का निश्चित अनुभव होता है क्योंकि ब्रहमस्वरूप श्री साॅई कण.कण में व्याप्त हैं, ऐसी कोई जगह नहीं जहाॅ उनका अस्तित्व ना हो । उनकी पूर्ण महिमा तो वेद.पुराण भी नहीं गा सकते । श्री साॅई जी के चरणों में मेरा कोटि.कोटि प्रणाम !!!
                                                                                                                                                                                                                                                                                राकेश यादव 
                                                                                                                                                                                                                                                                         साहित्य विभाग (गोडाउन )

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