Guru Aagya He Kevalam...

 पूज्य साईंजी के श्री चरणों मे कोटि-कोटि वंदन ।  मैं एक साल से साईंजी के सात्रिध्य में रह रहा हूंॅ । साईंजी द्वारा संचालित ओजस्वी जीवन विकास केन्द्र में रहकर मैं अपने आप को धन्य समझ रहा  हूंॅ। एक साल पहले साईंजी ने मुझसे कहा कि तुम ओजस्वी जीवन विकास केन्द्र में रहो और अध्ययन जारी रखो। जिंदगी में कभी भी मैं घर से बाहर नहीं रहा था पर गुरूदेव की आज्ञा शिरोधार्य कर मैं जयपुर केन्द्र में आया। मैं पहले बहुत ही साधारण विघार्थी था। मेरी बुद्धि कुशाग्र नहीं थी। मैं त्वरीत नहीं सोच पाता था। परन्तु जब से मैं पूज्य सांॅईजी की शरण आया मेरा जीवन उत्रति की ओर अग्रसर होता गया। कभी ऐसा अहसास भी न हुआ कि मैं घर परिवार से  दूर रह रहा हूंॅ। जब साईंजी रहते हैं तब उनका सात्रिध्य मिलता है और नहीं रहते हैं तो विश्वगुरू ओजस्वी पत्रिका पढता हूंॅ तो ऐसा लगता है कि सांॅई मेरा हर समय मार्गदर्शन कर रहे हैं। मुझे उत्रति की राह पर चला रहे है। मेरे भीतर नई-नई कलाओं का संचार कर रहे है। सांॅईजी की कृपा से मात्र एक साल में ही मैंने विडियो एडिटिंग, ओडियो एडिटिंग, वेबसाइट अपडेशन, क्लाईन्ट कम्यूनिकेशन, बिजनेस  कोआॅर्डिनेटर, ग्राफिक डिजाइनिंग, अकाउंट मेनेजमेन्ट, टैली, विडियो शुटिंग, फोटो शुटिंग, ड्र्ाइविंग इत्यादि कार्य कुशलतापूर्वक कर लेता हूंॅ और निरन्तर विकास जारी है। अभी हाल ही में मैंने स्टेट लेवल बिजनिस प्लान काॅम्पिटिशन में भाग लिया था जिसमें पूरे राजस्थान से बडे़-बडे़ स्कूल काॅलेजों के छात्र प्रतिभागी थे। इस  काॅम्पिटिशन की तैयारी वे एक-डेढ़ महिने से कर रहे थे। किन्तु साधारण तैयारी से ही पूज्य सांॅईजी की कृपा से प्रतियोगीता में मुझे प्रथम स्थान मिला। बाद में मुम्बई में  बिजनिस प्लान काॅम्पिटिशन नेशनल लेवल पर आयोजित हुआ और मुझे तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। पढाई में भी पहले से अधिक अंक आने लगे है। मेरी उम्र के बच्चे तो क्या, मेरे अध्यापक भी  मेरी बहुआयामी योग्यताओं को देखकर हैरान हो जाते हैं और वे कहते है तुम इनते छोटी उम्र में ही इतने सारे कार्य कुशलतापूर्वक कर लेते हो उसका राज क्या है? मैं उनसे इतना ही कहता हूंॅ:- कि ये सब मेरे सदगुरू सांॅईनाथ महाराज का ही कृपा प्रसाद है। अंत मे सभी विद्यार्थी भाई-बहनों को इतना ही  कहूंॅगा कि सभी मेरे समान पूज्यश्री के दर्शन, सत्संग व सात्रिध्य का दुर्लभ लाभ लें व जीवन उत्रत करें तथा घर पर रहते हुए विश्वगुरू ओजस्वी मासिक पत्रिका को जरूर पढे़ व औरों को पढ़ायें। अन्त में पूज्य सांॅई के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !

- प्रणव बक्शी (कक्षा - 12 )पीतमपुरा, दिल्ली

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